गुमनाम सी मौत

जीवन के पदचिन्ह कल जो मरा गली के नुक्कड़ पर,गुमनाम सी मौत,वो शायर ही होगा शायद....ताउम्र अहसासों की कुची सेरंग भरता रहा जिंदगी के,शफाक से कागजों पर...रंग ही न बचे उसकी -ज़िन्दगी के मुहाने पर कितनी सादगी से मौत ने... [पूरी पोस्ट]
writer Sudhir (सुधीर)

चिंतन

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[31 Mar 2010 01:30 AM]

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