क्षिप्रा के तीर -6
भाग-1, 2, 3, 4, 5, का अंतिम यदि कभी क्षत्रिय जाति का कोई देशभक्त संगठन हो, तो वहां कहना - ' इस संगठन के दुर्गादास जीवन भर तरसता रहा पर सफल नहीं हुआ और आप लोगों के लिए अप्रत्याशित सफलता पर उसने हार्दिक बधाईयाँ भेजी है |' यदि कौम के बन्दे कभी जंगल जंगल...
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क्षत्रिय
स्व.श्री तन सिंह जी कलम से
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[30 Mar 2010 20:25 PM]



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