पहचान
मैं पौधा था छोटा,अभी कुछ बरस पहले,नया नया वृक्ष मैं,अभी तो बना था....कुछ फूल खिले थे,डालियों पर मेरी,भवरो ने रस लेकर,उनको था गिराया...तब आए थे फल कुछ,मेरे भी तने पर,जो हवा के तेज झोंके,से गिर पड़े थे..एक बार थी आई,यूँ जोरो कि आंधी,मेरी टहनियों को भी,उड़ा...
[पूरी पोस्ट]
Astha Deo
9
0
0
0
0
[15 Mar 2010 10:22 AM]



Shuffle








