अच्छा आदमी...अंतिम भाग.

हिंदी हैं हम.. "पाता है आशु,दिसम्बर में चेन्नई वो चेन्नई नहीं रहता,जो अक्सर हम जानतें हैं|तब वहाँ बादल छातें हैं,ठंडी हवा भी चलती हैं,अक्सर वहाँ से जब ट्रेन गुजरती थी तो मैं सोचता था इतनी उमस में लोग कैसे रह पातें हैं|लेकिन,समुद्र तट पर जब मैं गया तो लगा, वो उफनती... [पूरी पोस्ट]
writer Astha Deo
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[20 Mar 2010 08:22 AM]

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