हमारे अपने मुखोटे

कुछ अधूरे एहसास हर शख्स यहाँ जल्दी मे है... हर दुकानदार को जल्द से जल्द सामान बेच घर जाने की जल्दी है...तो हर खरीददार को सस्ता सामान खरीद ने की...शहर के बीच इस शोर भरे बाज़ार मे हर सामान पर बोली पर बोली लग रही है... इन्ही दुकानों के बीच मुखोटों की एक दुकान...बहुत भीड़... [पूरी पोस्ट]
writer Anuj Gupta

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[21 Feb 2010 12:51 PM]

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