पिज्जा, खिलौना, विकल्प और मानव जीवन
यह प्रवीण पाण्डेय की बुधवासरीय अतिथि पोस्ट है। एक सामान्य घरेलू स्थिति से दर्शन में कैसे उतरा जाता है, वह प्रवीण से सीखने योग्य है: बच्चों की परीक्षायें समाप्त हुयीं और घर के वातावरण का उत्सवीकरण हो गया। अब युद्धक्षेत्र से लौटे विजयी (लगता तो है)...
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ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandey
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[30 Mar 2010 18:30 PM]



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