नव गीत: रंगों का नव पर्व बसंती --संजीव 'सलिल'

लखनऊ ब्लॉगर एसोसिएशन नव गीतसंजीव 'सलिल'*रंगों का नव पर्व बसंतीसतरंगा आया.सद्भावों के जंगल गायबपर्वत पछताया...*आशा पंछी को खोजे सेठौर नहीं मिलती.महानगर में शिव-पूजन कोबौर नहीं मिलती.चकित अपर्णा देख, अपर्णाहै भू की काया.सद्भावों के जंगल गायबपर्वत पछताया...*कागा-कोयल का अंतर... [पूरी पोस्ट]
writer आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'

samyik hindi kavita

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[30 Mar 2010 16:16 PM]

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