हाइकु-६
१- अपना दर्द भोगना पड़ता है हर किसी को। २- प्रतिध्वनियाँ गूँजती हैं रगो में जर्जर आस्था। ३- चाँदनी रात मकबरा खामोश ताजमहल? ४- शब्दों की भीड़ बीमार कल्पनाएँ अर्थ रहित। ५- सूरज फीका चाँद पीला-पीला सा चाँदनी रोई । ६- दिगभ्रमित दमघोटूँ खामोशी मूल्यहीनता ।...
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ramadwivedi
हाइकुhaiku
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[30 Mar 2010 13:24 PM]



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