अब मुझे कोई इन्तजार कहाँ

मेरी छोटी सी दुनिया मेरे कितने जिद करने पर तुमने मुझे चूमने के लिए अपने होंठो को आगे कर दिया था.. आँखे भी बाद थी तुम्हारी.. तुम्हारी वह मासूमियत देख कर तुम्हारे होंठो को चूम भी नहीं पाया था मैं.. बस देखता रह गया था वह समर्पण.. कुछ देर बाद आँखें खोलने पर तुमने मुझे... [पूरी पोस्ट]
writer PD
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[30 Mar 2010 13:22 PM]

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