औरतों की दुनिया में एक आदमी
वे दुखों में लिथड़ी हैंऔर प्रेम में पगीदिन-दिन भर खटीं किसी निरर्थक जांगर मेंबिना किसी प्रतिदान केरात-रात भर जगींउनके बीच जाते हुएडर लगता हैउनके बारे में कुछ कहते कुछ लिखतेदरअसलअपने तमामतर दावों के बावजूदकभी भीउनके प्रति इतने विनम्र नहीं हुए हैं हमइन...
[पूरी पोस्ट]
शिरीष कुमार मौर्य
मेरी कविता
20
3
0
3
6
[30 Mar 2010 12:11 PM]



Shuffle








