"किसी काम तो आऊँ"( ग़ज़ल )

aapkayogeshsharma लड़खड़ाना देख के मेरा, जो तुम संभल जाओ ,        नहीं होगा कोई शिकवा, मुझे फिर होश खोने का वजहें लाख मिल जाती हैं, तड़पने और शिकायत की बहाना एक नहीं मिलता, भला क्यों मुस्कुराने का जो समझ सको, जीत जाना ही बस... [पूरी पोस्ट]
writer Yogesh Sharma

"किसी काम तो आऊँ"

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[30 Mar 2010 10:37 AM]

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