आस जगे जब दिया जले

पुनश्च भोर की किरणें छितर जाएं,(सुबह ऑफिस के लिए निकलने का दृश्य)दोपहर यंू ही गुजर जाए,(ऑफिस में काम का दृश्य)तेरी गंध की जो याद आए,तनहाई पसर जाए।(लंच बॉक्स खोलते ही पत्नी की याद)मिलन हो जब शाम ढले।(शाम को दोनों अपने-अपने ऑफिस से निकल कर किसी मोड़ पर मिलते... [पूरी पोस्ट]
writer chetna
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[30 Mar 2010 07:18 AM]

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