मुहावरे ही मुहावरे !

अंधड़ ! तू डाल-डाल,मैं पात-पात,नहले पे दहले ठन गए,जबसे यहाँ कुछ अपने मुह मिंया मिट्ठू बन गए।ताव मे आकर हमने भी कुछ तरकस के तीर दागे,बडी-बडी छोडने वाले, सर पर पैर रखकर भागे ।अक्ल पे पत्थर पड गये क्या, आग मे घी मत डालो,दूसरों पर पत्थर फेकना छोडो, अपना घर... [पूरी पोस्ट]
writer पी.सी.गोदियाल

my lyrics

views
55
upvote
3
downvote
0
rating
3
comments
17
[30 Mar 2010 07:07 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix