ख्वाब तुम्हारा तोड़ दूं

वीर की कलम से लाओ मैं ही ख्वाब तुम्हारा तोड़ दूं, बेवफा होकर दिल तुम्हारा तोड़ दूं| अपने ही तो जलाते हैं जिस्म चिता में, मैं ख्याल बनकर ज़हन तुम्हारा छोड़ दूं| फिर तुम्हे मिले ना मिले कोई रहनुमा, आज मैं ही रास्ता तुम्हारा मोड़ दूं| Filed under: कविताएँ,... [पूरी पोस्ट]
writer वीर

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[30 Mar 2010 06:35 AM]

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