ना जी पाओगे
ख्यालों से मुझे ना समझ पाओगे,
लफ़्ज़ों से मुझे ना पकड़ पाओगे|
मेरे दर्द का एहसास तो होगा तुम्हे,
मेरी नम आँखों का ना देख पाओगे|
मुझे कतरा कतरा बाँट तो लोगे तुम,
इन कतरों से मुझे ना जोड़ पाओगे|
सुन भी लोगे सदा अगर चाहो तो,
मगर मेरी आह को ना सुन...
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वीर
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[30 Mar 2010 06:51 AM]



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