सादगी गुमा दी
सादगी गुमा दी माँ मैंने,
जिंदिगी उलझा ली माँ मैंने|
मिली ना सुकून की बूंद तो,
आंख अपनी भिगा ली माँ मैंने|
तू कहती थी होसला रख हमेशा,
देख उम्मीद की लौ बुझा दी माँ मैंने|
बनाता था कभी कागज से कश्तियाँ,
देख सारी कश्तियाँ डूबा दी माँ...
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वीर
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[30 Mar 2010 06:14 AM]



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