मालूम नहीं....
मेरे घर के सामने खड़ा.. नीम... रोज़ जल जाता है, हां....नीम का ये पेड़ कट-कट कर,गिर जाता है... कई मर्तबा .... पत्ते जब रफ्ता रफ्ता गिरते हैं.. ये जिया भी उसी के साथ... कहीं गुम जाता है.... टेढ़ी मेढ़ी सी ये सड़कें नज़र आती हैं आजकल.. हल्के पीले..भूरे...सूखे...
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tanu sharma.joshi
तुम .....
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[30 Mar 2010 05:43 AM]



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