चुप हो जाओ नहीं तो चलती ट्रेन से फेंक दूंगा
धर्म हमारे यहां एक बेहद संवेदनशील विषय हैं. धर्म या भगवान के बारे में कुछ भी बोलने से लाखों लोगों की भावनाएं ऐसे भड़कती हैं जैसे अपनी परछाईं को देखकर भेड़ या लाल कपड़े को देखकर सांड़ भड़कता है. मुझे तो लगता है कि इन्सान इस विषय पर ऐसा भड़कता है कि...
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विकास
धर्म
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[30 Mar 2010 03:51 AM]



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