सत्तू
..................हम दोनों डान की कैद से जरुर निकल आये ....अब ...क्या , क्या मैं ,जो वादा डान से कर के आया हूँ ,उसे पूरा कर पाउँगा ? इसी सोच में दो दिन गुज़र गया .........मैं अपनी झोपड़ी से निकला ही नहीं .....बिरजू ,मेरा दोस्तइतना डरा हुआ था ,बस एक ही रट...
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भंगार
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[30 Mar 2010 02:50 AM]



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