पथ की पहचान

मेरे बोलों को तुम अपनी रवानी दे दो !!! पूर्व चलने के बटोही बाट की पहचान कर ले।पुस्तकों में है नही छापी गई इसकी कहानीहाल इसका ज्ञात होता है न औरों की ज़बानीअनगिनत राही गए इस राह से उनका पता क्यापर गए कुछ लोग इस पर छोड पैरौं की निशानीयह निशानी मूक होकर भी बहुत कुछ बोलती हैखोल इसका अर्थ पंथी पंथ... [पूरी पोस्ट]
writer Anurag Srivastava

हरिवंशराय बच्चन

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[30 Mar 2010 02:10 AM]

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