"मेरा जीवन कोरा कागज़, कोरा ही रह गया"
लिखना बहुत कुछ चाहता हूँ। लिखने को बातें भी ढेर सारी हैं मन में। मगर, कुछ हो गया है। किसी अपने से जब दिल दुःख जाये तो क्या हो? या उससे भी ज्यादा जब किसी अपने का दिल खुद दुखा दो तब क्या हो? आत्म-ग्लानि की एक रात यूँही करवटें बदलते बदलते कट गयी। मन में बहत...
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Aashu
hindi
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[30 Mar 2010 00:35 AM]



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