अधर्मी और धर्म-विरोधी मैं
मेरे कस्बे में आए दिनों किसी न किसी साधु-सन्त के प्रवचन आयोजित होते रहते हैं। जब-जब भी ऐसा होता है, मेरी शामत आ जाती है।साधु-सन्त के अथवा/और उनके मत के अनुयायी आग्रह करते हैं कि मैं ऐसे प्रवचनों में नियमित रूप से अपनी उपस्थिति दर्ज कराऊँ। कोई पन्द्रह बरस...
[पूरी पोस्ट]
विष्णु बैरागी
धर्म की दुकानदारी
27
4
0
4
3
[29 Mar 2010 23:59 PM]



Shuffle








