प्यारे कृष्ण कन्हैया

मेरे बोलों को तुम अपनी रवानी दे दो !!! कलयुग में अब ना आना रे प्यारे कृष्ण कन्हैयातुम बलदाऊ के भाई यहाँ हैं दाउद के भैया।।दूध दही की जगह पेप्सी, लिम्का कोकाकोलाचक्र सुदर्शन छोड़ के हाथों में लेना हथगोलाकाली नाग नचैया। कलयुग में अब. . .।।गोबर को धन कहने वाले गोबर्धन क्या जानेंरास रचाते पुलिस... [पूरी पोस्ट]
writer Anurag Srivastava

कवितायें

views
14
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
2
[29 Mar 2010 18:11 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix