मेरी नज़र में-नाटककार चरणदास सिद्धू (भाग-2)

अमिताभ अनुभव जब एकत्र हो जाते हैं तो वे रिसने लगते हैं। मस्तिष्क में छिद्र बना लेते हैं और ढुलकने लगते हैं, कभी-कभी हमे लगता है अपनी खूबियों को बखानने के लिये व्यक्ति लिख रहा है, बोल रहा है या समझा रहा है। किंतु असल होता यह है कि अनुभव बहते हैं जिसे रोक पाना... [पूरी पोस्ट]
writer अमिताभ श्रीवास्तव

भाग-2

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[29 Mar 2010 14:48 PM]

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