नायक और खलनायक-व्यंग्य कवितायें (nayak aur khalnayak-hindi vyangya kavitaen)
धोखे, चाल और बेईमानी काअपने दिमाग में लियेबढ़ा रहे हैं वह अपना हर कदम,अपनी जुबान से निकले लफ्ज़ोंऔर आंखों के इशारो सेजमाने का भला करने का पैदा कर रहे वहम।भले वह सोचते हों मूर्ख लोगों कोपर हम तोलने में लगे हैं यह किकौन होगा उनमें से बुरा कम,किसे लूटने दें...
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दीपक भारतदीप
sher
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[29 Mar 2010 12:58 PM]



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