मृत्यु विह्वल कर ही देती है!

जनपद किसी भी आत्मीय की मृत्यु विह्वल कर देती है। और फिर पुत्रशोक की विह्वलता के बारे में तो कहना ही क्या। इस संदर्भ में कवि श्रीकांत वर्मा की यह कविता पढ़ने के पूर्व इतना याद रखिए कि परिस्थितिवश काशी में श्मशान के डोम का काम करने वाले राजा हरिश्चंद्र के पुत्र... [पूरी पोस्ट]
writer अरविन्द चतुर्वेद
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[29 Mar 2010 12:12 PM]

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