‘‘बलिदान से मेवाड़ की धरती आज भी दैदीप्यमान’’
कुँवर राजेन्द्र सिंह शेखावत, चित्तौड़गढ़’’अपने सतीत्व की रक्षा के लिये जौहर में अपने चंदन तन को होम करने वाली विरांगनाओं को, जिनका नाम इतिहास के पन्नों में कहीं दर्ज नहीं है, जिनके अतुलनीय बलिदान से मेवाड़ की धरती आज भी दैदीप्यमान है। जिस कारण मेवाड़ का...
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[18 Mar 2010 12:11 PM]



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