आम आदमी का नहीं यह शहर
सरकार को खूबसूरत दिल्ली दिखाना है। इस बहाने हक की लड़ाई लड़ने वालों को महानगर से हटाया जा रह है। कई दिन हुए जंतर-मंतर का वजूद खत्म कर दिया गया। सरकार के खिलाफ अब यहां कोई चौबीस घंटे आवाज नहीं उठा सकता। ऐसा लगता है कि यहां से मुखर होता असहमति का स्वर...
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खंभा
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[29 Mar 2010 10:29 AM]



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