शायद... बयाँ हो जाये

abhivyakti लिख रही हूँ इबारते कभी मन ही मनकभी कागज पर कलम सेसोच कर यही कि शायद इस बार हाल ए दिल आरजू ए जिंदगी और जुस्तजू ए सफ़र बयाँ हो जाये मगर मुक्कदर की मुफलिसी में ये मुनासिब कहाँ जितना चलती हूँ रास्तें उतने ही लम्बे हो जाते है हकीकत की बात हो तो कह... [पूरी पोस्ट]
writer himani
views
14
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
3
[29 Mar 2010 08:58 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix