लधुकथा - नकली मुठभेड़

Dr. Smt. ajit gupta डी.आई.जी. सुधांशु अपने कक्ष में आज अकेले बैठे हैं। तभी डी.वाय.एस.पी. शर्मा ने उनके कमरे में प्रवेश किया। शर्माजी आज बहुत खुश थे। उनकी प्रसन्नता छिपाए नहीं छिप रही थी। वे उत्साह में भरकर डी.आई.जी को बता रहे थे कि सर! आज हमें बहुत बड़ी सफलता हाथ लगी है।... [पूरी पोस्ट]
writer Dr. Smt. ajit gupta

लघुकथा

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[29 Mar 2010 08:12 AM]

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