इक सपना
इक सपना सा जगा था आंखों में उमंग का, उल्लास का, तरंग कापैदा हुई थी सिरहन मन मस्तिष्क में सोचा था यही वो नवजीवन है जिसका मुझे इंतजार था मगर आंधी के झोंके की तरह न जाने कैसे सारा उल्लास उमंग तरंग काफूर हो गया अब रह गया...
[पूरी पोस्ट]
प्रवीणा जोशी
8
0
0
0
0
[05 Jan 2010 06:18 AM]



Shuffle








