दोमुहे जानवर (कहानी)
सच में घुटन होती है इस समाज में इनलोगों के बीच ..मुग्धा ने अपने चेहरे से पसीना पोछते हुए सोचा,वो अभी भी पसीने से भीगी अपनी पीठ पर मिस्टर शुक्ला की निगाहें महसूस कर रही थी उस आदमी को देख कर हमेशा मुग्धा को लिजलिजापन महसूस होता है ...जैसे भाव छिपकली को देख...
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Sonal Rastogi
नारी
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[29 Mar 2010 05:38 AM]



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