जाने क्यों वो गुल्लक आजकल मुझे घूरता रहता है
जाने क्यों आजकल हर घर से बहुत शोर आता हैधब-धब-धब की आवाजें, लगता है छत पर कोई कूद रहा हैचीखना चिल्लाना, रोना-गाना लगता है “कुछ” हो गयाजाने क्यों आजकल सूरज भी अकड़ा हुआ हैनाराज है शायद मुझसेसबसे पहले जगाने के लिए मुझे ही आ जाता हैमैं रात चाहे कितनी देर से...
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शिवेंद्र
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[29 Mar 2010 04:56 AM]



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