महामना लंपटेश्वर चमचा, सर्वत्र व्याप्तये

ख़बर वो, जो ले सबकी ख़बर...... चमचों का इतिहास कलिकाल से चला आ रहा है। सबने अपने अपने चमचे बनाए। और चमचे थे कि बनते चले गए। कलिकाल की परंपराओं को जीवत रखना वर्तमान का ठेका है। इस लिहाज़ से हर कोई परंपराओं का ठेकेदार है। चमचैली परंपरा इन्हीं कारणों से जीवित है। सभी इसको जीवित रखना... [पूरी पोस्ट]
writer anupam mishra
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[29 Mar 2010 03:26 AM]

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