लीक पर चलना, कहाँ दुश्वार है

नीरज खौफ का जो कर रहा व्यापार है आदमी वो मानिये बीमार है चार दिन की ज़िन्दगी में क्यूँ बता तल्खियाँ हैं, दुश्मनी, तकरार है जिस्म से चल कर रुके, जो जिस्म पर उस सफ़र का नाम ही, अब प्यार है दुश्मनों से बच गए, तो क्या हुआ दोस्तों के हाथ में तलवार है लुत्फ़ है जब... [पूरी पोस्ट]
writer नीरज गोस्वामी
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[29 Mar 2010 00:35 AM]

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