एक्स्ट्रा क्लास

काव्य कलश बस्ता उठा टिंकू चला , चार चोराहे पार |थक कर जब स्कूल पहुंचा , पता लगा रविवार ||पता लगा रविवार , नहीं बजेगा घंटा घंटी |पड़ेगी घर पर मार  , नहीं कल की गारंटी ||फिर चलाया दिमाग , मम्मी करनी कक्षा  पास |जाना   हर रविवार , चलेगी अब ... [पूरी पोस्ट]
writer amritwani.com

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[28 Mar 2010 22:35 PM]

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