कबीर के श्लोक - १५
कबीर मरता मरता जगु मुआ, मरि भी न जानिआ कोइ॥
ऐसे मरने जे मरै, बहुरि न मरना होइ॥२९॥ कबीर जी कहते है कि यह संसार निरन्तर मृत्यु का ग्रास बनता जा रहा है,लेकिन यह सब देख कर भी हम मौत को भुलाए बैठे रहते हैं। यदि हम इसी तरह मरते है तो हमारे बार बार मरने पर भी...
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परमजीत बाली
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[28 Mar 2010 21:39 PM]



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