मनोव्यथा
मन चलो एकांत में सुख शान्ति से जीवन बिताने,दु:ख कुछ जग का भुलाने,आग कुछ उर की बुझाने ! हँस रहा जग देख तुझको रुक न पल भर भी दिवाने,बस चला चल राह अपनी इक नयी दुनिया बसाने !शून्य में चल गगन को कुछ दु:खमयी ताने सुनाने,व्यंग से कुचले ह्रदय केभाव कुछ उसको...
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Sadhana Vaid
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[28 Mar 2010 21:03 PM]



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