क्षिप्रा के तीर -4
भाग-1 , 2 , 3 से आगे............. इतना होते हुए भी मुझे देश निकला दिया गया | मेरी अटूट निष्ठां और सतत सेवा के बदले मुझे काले वस्त्र ,काला घोडा और काली ढाल मिली | मैंने इस उपहार को भी ख़ुशी से स्वीकार किया और मैं चल पड़ा उस माँ मरुधरा से , जिसके लिए मैं...
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क्षत्रिय
स्व.श्री तन सिंह जी कलम से
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[28 Mar 2010 20:37 PM]



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