भाव-उद्वेग

गूंजअनुगूंज / GUNJANUGUNJ भाव-उद्वेग में चुप रहना सबसे बड़ा संयम है । भाव-उद्वेग की स्थिति में विवेक मनुष्य का साथ छोड़ देता है और मनुष्य अनुचित कर्म कर बैठता है । गुस्सा भाव-उद्वेग का ज्वलंत रूप है । गुस्से में जो मौन को साध कर अंतस-चित्त का अध्ययन करता है, वह शांत होना सीख जाता... [पूरी पोस्ट]
writer Manoj Bharti

जीवन-सूत्र

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[23 Jan 2010 13:57 PM]

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