प्रेम की पातियाँ

गूंजअनुगूंज / GUNJANUGUNJ प्रेम मुक्त करता है, बांधता नहीं । प्रेम मुक्त गगन का पक्षी है, जो मानव ह्रदय में उड़ान भरता है । प्रेम बरसता है, गरजता नहीं । प्रेम खिलना जानता है,सिकुड़ना नहीं । प्रेम दो ह्रदयों के बीच एक अहसास है । प्रेम मांगना नहीं देना जानता है । प्रेम आँखों में... [पूरी पोस्ट]
writer Manoj Bharti

प्रेम

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[30 Jan 2010 08:39 AM]

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