आध्यात्म

गूंजअनुगूंज / GUNJANUGUNJ सपने टूटेदिल चटखासब कुछ बिखराएक अटूट रिश्ताबांधे रहा मुझे उससेजो अदृश्य थालेकिन मजबूत था इतनाकि जो बिखर जाना चाहिए थाउसे आरोह के शिखर तक पहुँचा करअंशों में स्वयं का रूपदिखा गयामैं अभिभूत हूँ उस शक्ति सेजो सदा मुझे अंशों मेंउस अनंत का रूप दिखा देती हैऔर... [पूरी पोस्ट]
writer Manoj Bharti

कविता

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[03 Mar 2010 12:02 PM]

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