प्रेम

गूंजअनुगूंज / GUNJANUGUNJ प्रेम से बड़ी इस जगत में दूसरी कोई अनुभूति नहीं है । प्रेम की परिपूर्णता में ही व्यक्ति विश्वसत्ता से संबंधित होता है। प्रेम की अग्नि में ही स्व और पर के भेद भस्म हो जाते हैं और उसकी अनुभूति होती है, जो कि स्व और पर केअतीत है । धर्म की भाषा में इस सत्य की... [पूरी पोस्ट]
writer Manoj Bharti

पुनरावृत्ति

views
8
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[27 Mar 2010 10:31 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix