तुलसीदास ने ही सर्वप्रथम आरंभ की रामलीला

उत्सव के रंग भारतीय संस्कृति में कोई भी उत्सव व्यक्तिगत नहीं वरन् सामाजिक होता है। यही कारण है कि उत्सवों को मनोरंजनपूर्ण व शिक्षाप्रद बनाने हेतु एवं सामाजिक सहयोग कायम करने हेतु इनके साथ संगीत, नृत्य, नाटक व अन्य लीलाओं का भी मंचन किया जाता है। यहाँ तक कि भरतमुनि ने... [पूरी पोस्ट]
writer KK Yadava

दशहरा

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[25 Sep 2009 13:38 PM]

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