संजीवनी
हृदय तिमिर को बींधतीतेरी रूह की सिसकती आवाज़जब मेरे हृदय कीमरुभूमि से टकराती हैमुझे मेरे होने का अहसास करा जाती हैजब तेरे प्रेम की स्वरलहरियाँ हवा केरथ पर सवार होमेरा नाम गुनगुना जाती हैंमुझे जीने का सबबसिखा जाती हैंजब दीवानगी...
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वन्दना
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[28 Mar 2010 11:54 AM]



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