देखना लौटती डोंगियों को जिनके आवारा मस्तूलों पर हवा के थपेड़ों ने जर्जर शब्दों में कुछ लिख दिया है .इस मायावी-दुनियावी का शायद कोई गीत ...

ताना-बाना पतझर कि उमस भरी सुबह में एकाध दिन ऐसा भी होता है ,...यही की एक छोटी सी जगह में दो तीन शब्दों से बना एक नाम अपने तपे हुए रंग में घटित होता हुआ दिखाई देता है,एकदम अनुतरित ,गुपचुप अपने मौन में ,अपनी यात्रा से उबा हुआ,थका सा ,आरोह-अवरोह में लेकिन किसी पूर्व... [पूरी पोस्ट]
writer Vidhu
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[28 Mar 2010 10:12 AM]

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