देवनागरी लिपि की महिमा.

कवि बाबा कानपुरी २१ मार्च को शिलांग(मेघालय) में आयोजित ३२वें अखिल भारतीय नागरी लिपि सम्मेलन में प्रस्तुत, देवनागरी लिपि की महिमा समेटे एक कविता.भाषा बोली के चुन-चुन कर, तिनके-तिनके, रोड़ा-रोड़ा|एक नागरी लिपि है, जिसने- एक सूत्र में सब को जोड़ा||बंगाली हो याकि... [पूरी पोस्ट]
writer Baba Kanpuri
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[28 Mar 2010 08:55 AM]

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