तेलुगु के मानवतावादी कवि श्रीश्री : शताब्दी संदर्भ
" श्रम निष्फलमै, जनि निष्ठुरमै,नूतिनि गोतिनी वेदिकेवाल्ल्लु,अनेकुलिंका अभाग्युलंता,अनाथुलंता,अशांतुलंता,दीर्घ श्रुतिलो, तीव्र ध्वनि तोविप्लव शंखम् विनिपिस्तारोई "(भाव : जब शोषित लाचार होगा और शोषकों के अत्याचार बढ़ेंगे तब सारे श्रमिक व शोषित वर्ग का...
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गुर्रमकोंडा नीरजा
स्रवंति
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[28 Mar 2010 08:25 AM]



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