काव्य की एक नई विधा जनक छ्न्द

कवि बाबा कानपुरी जो स्वभाव से गाय हैं,शोषण उनका हो रहा,वहीं आज असहाय हैं.बाहर से खामोश हैं,झलक रहा तूफान सा,भीतर उसके रोष हैं.मिला जो कि वो कम नहीं,जो न मिला उसका हमें,किंचित कोई गम नहीं.मानव दानव एक हैं.नैतिकता का फ़र्क बस,लगते सभी अनेक हैं.रोम रोम में राम जोबसे, छावनी... [पूरी पोस्ट]
writer Baba Kanpuri
views
15
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[13 Mar 2010 07:18 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix