फेंको ये किताबें...
हाँ हाँ यादों में है अब भी, क्या सुरीला वो जहाँ था, हमारे हाथों में रंगीन गुब्बारे थे, और दिल में महकता समां था, यारा हो ...
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Pankaj Upadhyay (पंकज उपाध्याय)
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[28 Mar 2010 06:57 AM]



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